मेरा देश तुम्हारा देश,
देश कोई भी हो आप या कि हम रहे आज़ाद ख्यालो की
आमीन
शनिवार, 27 नवंबर 2010
गुरुवार, 6 मई 2010
उड़न पाखी
मेरा नाम पाखी है,
चाहती हूँ ,
दूर गगन तक पंख खोल,
सीमान्त छु,
फिर लौट कर,
घर सो जायुं....
बाबा मेरे-
आश में,
माँ मेरी ,
धरकन बनी,
ता उम्र मुझ में,
गुदगुदी बन,
हँसते रहें...
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